Ayodhya Ram Mandir इस दौरान वह राम मंदिर आंदोलन के पूरे आंदोलन के कानूनी पक्ष पर बात रखेंगे.

Ayodhya Ram Mandir इस दौरान वह राम मंदिर आंदोलन के पूरे आंदोलन के कानूनी पक्ष पर बात रखेंगे. – 22 जनवरी 2024 को भगवान राम लला सरकार श्री राम जन्मभूमि अयोध्या जी के भव्य मंदिर में विराजमान होने जा रहे हैं. इस दिन के लिए लोगों ने त्याग तपस्या बलिदान दिया है. ऐसे ही 90 के दशक में श्री राम जन्मभूमि को लेकर आंदोलन किया गया, जिसमें देश भर से कार सेवक अयोध्या पहुंचे थे. इन्हें रोकने के लिय पुलिस की ओर से गोलियों की बौछार की गई और सैकड़ों राम भक्तों को अपने प्राणों का बलिदान देना पड़ा. चारों तरफ लाशें बिछी हुई थी. गंगा के किनारे लाशें जलाई जा रही थी. लाशों के ढेर में लोग कहीं अपनों को ढूंढ रहे थे तो कहीं किसी लाश के पास बैठकर चीख रहे थे चीत्कार रहे थे

Ayodhya Ram Mandir इस दौरान वह राम मंदिर आंदोलन के पूरे आंदोलन के कानूनी पक्ष पर बात रखेंगे. – सिंघल 20 साल तक विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के कार्यकारी अध्यक्ष रहे. माना जाता है कि सिंघल ही वो व्यक्ति थे जिन्होंने अयोध्या विवाद को स्थानीय ज़मीन विवाद से अलग देखा और इसे राष्ट्रीय आंदोलन बनाने में अहम भूमिका निभाई.

शीतला सिंह ने अपनी किताब के पेज नंबर 110 में इस घटना का ज़िक्र किया है। उनकी जानकारी का स्रोत हैं के. एम. शुगर मिल्स के मालिक और प्रबंध संचालक लक्ष्मीकांत झुनझुनवाला। झुनझुनवाला उस वक्त के विहिप के वरिष्ठ नेता विष्णुहरि डालमिया के लिए कुछ काग़ज़ात लेने शीतला सिंह के पास आए थे और काग़ज़ लेकर दिल्ली लौट गए

सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्वीट कर कहा था, ”जीत की इस घड़ी में हमें अशोक सिंघल को याद करना चाहिए. नमो सरकार को उनके लिए तत्काल भारत रत्न की घोषणा करनी चाहिए.”

कार्यक्रम के दूसरे दिन 10 दिसंबर को बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी राम मंदिर निर्माण के ऐतिहासिक महत्व पर बात करेंगे. वहीं, ज्ञानवापी मस्जिद विवाद से जुड़े वकील विष्णु शंकर जैन छह जनवरी के वेबिनार में मुख्य वक्ता होंगे. इस दौरान वह राम मंदिर आंदोलन के पूरे आंदोलन के कानूनी पक्ष पर बात रखेंगे.

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